By PACHAURI GURUJI

अष्टादश पुराणेषु व्यासस्य वचनं द्वयं।
परोपकाराय पुण्याय पापाय परपीडनं।।

वेदव्यास द्वारा रचित अठारह पुराणों का सार तत्व है कि परोपकार करने से पुण्य की प्राप्ति होती है। और दूसरों को दुःख देने से पाप की प्राप्ति होती है।। अस्तु विवेक से कर्म करें।।